द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल द्वारा वार्षिक प्रदर्शनी “परंपरा 2026 – विरासत: हमारा देश, हमारी धरोहर” का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक, वैज्ञानिक एवं बौद्धिक विरासत का उत्सव मनाया गया। विद्यालय परिसर भारत के गौरवशाली अतीत, समृद्ध परंपराओं और कालजयी ज्ञान की जीवंत झलक प्रस्तुत करता हुआ एक अद्भुत सांस्कृतिक मंच बन गया।

इस अवसर पर काशीपुर के माननीय महापौर श्री दीपक बाली जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने नन्हे विद्यार्थियों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उनके उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्यालय द्वारा कक्षा-कक्षीय शिक्षा को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के प्रयास की भी प्रशंसा की।
यह आयोजन अध्यक्ष डॉ. नीरज कपूर जी एवं निदेशक डॉ. वसुधा कपूर जी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित किया गया। उनकी परिकल्पना को JMD सुश्री कामाक्षी कपूर जी एवं प्रिंसिपल, अर्ली इयर्स श्रीमती विभा तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में समन्वयकों, शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों एवं संपूर्ण गुरुकुल परिवार का समर्पित योगदान रहा।

प्रदर्शनी का सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षणों में से एक रहा। कक्षा III के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण “गीता सार” ने मंच पर श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत शिक्षाओं को जीवंत कर दिया और दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से कर्तव्य, साहस, निःस्वार्थ भाव और आंतरिक शक्ति जैसे जीवन-मूल्यों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

कक्षा II के विद्यार्थियों ने मधुर शास्त्रीय संगीत रचना “बंदिश” प्रस्तुत की, जबकि कक्षा II एकलव्य के विद्यार्थियों ने मनमोहक शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। LKG चाणक्य के नन्हे विद्यार्थियों ने “देश रंगीला” पर जोशीली नृत्य प्रस्तुति देकर वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। वहीं LKG द्रोणाचार्य के विद्यार्थियों ने विभिन्न भारतीय राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा को प्रदर्शित करते हुए एक रंगारंग कॉस्ट्यूम परेड प्रस्तुत की, जिसने भारत की “विविधता में एकता” की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत की।

शैक्षणिक प्रदर्शनी की शुरुआत सबसे छोटे विद्यार्थियों से हुई। प्री-नर्सरी के विद्यार्थियों ने भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों का आत्मविश्वासपूर्वक परिचय दिया। LKG के विद्यार्थियों ने भारतीय शास्त्रीय एवं लोक नृत्य शैलियों की समृद्ध परंपरा को प्रदर्शित किया, जबकि UKG के विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय खेलों एवं त्योहारों को रंगीन और संवादात्मक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया।

कक्षा I के विद्यार्थियों ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प, प्राचीन परिवहन साधनों, प्रमुख नदियों और विशाल पर्वत श्रृंखलाओं का अध्ययन प्रस्तुत किया। उनके प्रदर्शनों ने यह समझने में सहायता की कि भारत की भौगोलिक विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और हस्तकला ने देश की सांस्कृतिक पहचान को किस प्रकार आकार दिया है।
कक्षा II के विद्यार्थियों ने शिक्षा, संचार एवं परिवहन के क्षेत्रों में “तब और अब” की रोचक तुलना प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंने हम्पी, महाबलीपुरम, अजंता एवं एलोरा की गुफाओं तथा सांची स्तूप सहित भारत के भव्य स्मारकों एवं ऐतिहासिक धरोहर स्थलों को प्रदर्शित किया। एक अन्य खंड में विभिन्न भारतीय संगीत शैलियों एवं उनके सांस्कृतिक महत्व से भी दर्शकों को परिचित कराया गया।
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक का भी सुंदर समावेश देखने को मिला। कक्षा II चाणक्य के विद्यार्थियों ने Scratch Coding का उपयोग करते हुए एक इंटरैक्टिव Car Parking Game विकसित किया। यह स्टॉल सीखने और मनोरंजन का एक आकर्षक केंद्र बन गया, जिसने बच्चों के साथ-साथ बड़ों का भी ध्यान आकर्षित किया।
कक्षा III के विद्यार्थियों ने आगंतुकों को प्राचीन भारत की बौद्धिक एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों की एक अद्भुत यात्रा पर ले गए। उनके प्रदर्शनों में प्राचीन भारतीय विश्वविद्यालय, चाणक्य नीति, शून्य की खोज, भारत के महान महाकाव्य, पाणिनि का संस्कृत व्याकरण में योगदान, सुश्रुत का शल्य चिकित्सा में योगदान, आयुर्वेद तथा आर्यभट्ट की गणित एवं खगोल विज्ञान में उपलब्धियाँ प्रमुख रूप से शामिल थीं। इन प्रस्तुतियों ने प्रभावी ढंग से दर्शाया कि भारत का प्राचीन ज्ञान आज भी आधुनिक विश्व को प्रभावित कर रहा है।
प्रदर्शनी के दौरान प्रत्येक कक्षा अन्वेषण, कहानी, रचनात्मकता और अनुभवात्मक अधिगम का केंद्र बन गई। शोध, भूमिका-अभिनय, नृत्य, संगीत, कला, मॉडल निर्माण, कोडिंग और सार्वजनिक प्रस्तुति जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास, संचार, सहयोग, रचनात्मकता एवं आलोचनात्मक चिंतन जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित किए।
परंपरा 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि यह भारत की समृद्ध विरासत को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि थी। यह आयोजन युवा विद्यार्थियों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और उन्हें भारत के गौरवशाली अतीत से परिचित कराने का एक प्रेरणादायक प्रयास रहा।
विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, शिक्षकों की अथक मेहनत और अभिभावकों के अपार सहयोग ने इस आयोजन को “हमारा देश, हमारी धरोहर” की भावना से ओत-प्रोत एक यादगार उत्सव बना दिया।




