October 17, 2026
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सुदर्शन समाचार ब्यूरो

काशीपुर, उत्तराखंड। ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, काशीपुर के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. शिशिर नंदी को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में तथा औषधीय एवं जैव-अणुक रसायन विज्ञान की उप-श्रेणी में विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में चयनित किए गए। साथ ही संस्थान के विभागाध्यक्ष प्रो. शिशिर नंदी के मार्गदर्शन एवं शोध सहभागिता से संबंधित शोधपत्र “Nano-Heal: a computational-experimental integrated framework for fabricated diabetic wound therapeutics” को 33वीं पश्चिम बंगाल राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस 2026 में जैविक विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी श्रेणी में छठा स्थान प्राप्त हुआ।
इस कांग्रेस में विज्ञान के विभिन्न विषयों से जुड़े कुल 215 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा कुल 215 शोधपत्रों का चयन किया गया। जैविक विज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी श्रेणी में चयनित 21 शोधपत्रों में “Nanoheal” ने छठा स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।
यह शोध कल्याणी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की साइटोजेनेटिक्स एवं आणविक जीवविज्ञान प्रयोगशाला, एनआईटी दुर्गापुर तथा ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, काशीपुर के संयुक्त सहयोग से किया गया। शोधपत्र का प्रस्तुतीकरण युवा शोधकर्ता सायोनी दाम द्वारा डॉ. अस्मिता सामद्दार, प्रो. शिशिर नंदी तथा प्रो. अनीसुर रहमान खुदा-बख्श के मार्गदर्शन में किया गया।
इस शोध का प्रमुख उद्देश्य होम्योपैथी में प्रयुक्त दो मदर टिंचर—इचिनेशिया (Echinacea) एवं रूटा (Ruta)—से प्राप्त सिल्वर नैनोपार्टिकल्स के माध्यम से कटने एवं घावों से होने वाले संक्रमणों से बचाव की संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना है।
उल्लेखनीय है कि इस शोध से संबंधित अध्ययन अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित शोध पत्रिका Chemical Engineering Journal में प्रकाशित हुआ है, जिसका प्रकाशन एल्सेवियर (Elsevier) समूह द्वारा किया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस शोध में कंप्यूटर-आधारित तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सूक्ष्मजीव-आधारित मॉडलों, जीवाणुओं के लिए आवश्यक प्रोटीनों तथा चूहों सहित पशु मॉडलों का उपयोग करके विकसित नैनोमेडिसिन की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया। शोधकर्ताओं ने सूक्ष्मजीवों के डीएनए पर अणुओं के प्रभाव के अध्ययन हेतु एक वैज्ञानिक रूपरेखा विकसित करने में भी योगदान दिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, एल्सेवियर एवं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका के आँकड़ों के आधार पर उनकी वैश्विक रैंक 358060 बताई गई है।
यह उपलब्धि संस्थान की शोध-उन्मुख शैक्षणिक गतिविधियों, अंतर-संस्थागत सहयोग तथा वैज्ञानिक नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। इस उपलब्धि पर संस्थान के प्रबंधक डॉ० अनिल कुमार सक्सेना एवं निर्देशक, डॉ. दीपक तेवतिया, डी फार्मा विभाग अध्यक्ष अरुण कुमार,डॉ० सरफ़राज़ अहमद, डॉ० रंजना, मुनीर आलम, स्वाति टम्टा, अंजलि नेगी, शहजाद अंसारी, हर्ष शारदा, शंध्या धारकीया, मीनल ठाकुर, अभीतुल पचौरी, मो० शाहनूर, आशिया, कुलदीप सिंह, राहुल कुमार, साकिब एवं समस्त स्टाफ ने इस उपलब्धि पर संस्थान के विभाग अध्यक्ष डॉ. शिशिर नंदी को शुभकामनाए दी ।

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