May 26, 2026
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सुदर्शन समाचार ब्यूरो

डॉ. वसुधा कपूर के दूरदर्शी नेतृत्व में शिक्षा को नई दिशा देने की ऐतिहासिक पहल
काशीपुर:आज जब पूरा विश्व शिक्षा को केवल सूचना और कौशल तक सीमित रखने के बजाय उसे जीवन, संस्कृति, नैतिकता और वैश्विक नेतृत्व से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे समय में The Gurukul Foundation School द्वारा आयोजित “सामन्वय” कार्यक्रम भारतीय शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल बनकर सामने आया है। यह केवल एक शैक्षिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा को भारतीयता, आधुनिक विज्ञान और मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ने का एक गंभीर एवं सार्थक प्रयास है।


विद्यालय की निदेशक Dr. Vasudha Kapur के मार्गदर्शन में पिछले लगभग तीन वर्षों से भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS), आधुनिक शिक्षा, STEAM, Artificial Intelligence, अनुभवात्मक शिक्षण और मूल्यपरक शिक्षा को एकीकृत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

Dr. Vasudha Kapur

यह प्रयास इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा और अंक नहीं, बल्कि ऐसे विचारशील, संवेदनशील और आत्मविश्वासी नागरिक तैयार करना है जो अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखते हों।

Dr. Deepak Paramashivan


इसी शैक्षिक दृष्टि को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से Dr. Deepak Paramashivan का तीन दिवसीय प्रेरणादायक शैक्षिक प्रवास विद्यालय में आयोजित किया गया। Indian Institute of Technology Madras से जुड़े डॉ. दीपक परमशिवन भारतीय ज्ञान प्रणाली, संगीत, विज्ञान, संस्कृत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरविषयक शिक्षण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनके संवादों और सत्रों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को यह समझने का अवसर दिया कि वास्तविक शिक्षा विषयों की सीमाओं में बंधी नहीं होती, बल्कि जीवन के प्रत्येक आयाम से जुड़ी होती है।


इस तीन दिवसीय प्रवास का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण “Indian Knowledge Systems for Future Ready Education: Balancing Tradition, Innovation and Global Readiness” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा रही। इस चर्चा में शिक्षा, प्रबंधन, भारतीय चिंतन और भविष्यपरक शिक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लेते हुए भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा का पूरक बताया। चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है।


डॉ. दीपक परमशिवन ने स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली आधुनिक विज्ञान का विरोध नहीं करती, बल्कि उसे अधिक मानवीय, संतुलित और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि प्राचीन भारत में गणित, संगीत, विज्ञान, दर्शन और प्रकृति को अलग-अलग नहीं देखा जाता था। यही समग्र दृष्टिकोण आज की शिक्षा की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

Dr. Vaibhav Bhamoriya


Dr. Vaibhav Bhamoriya ने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित नेतृत्व, नैतिकता और जीवन प्रबंधन की अवधारणाओं को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर निर्माण नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी होना चाहिए।


विद्यालय की प्रधानाचार्या Minal Badhwar तथा अर्ली ईयर्स कैंपस की प्रधानाचार्या Vibha Tiwary ने इस बात पर बल दिया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली को केवल पुस्तकों या विशेष अवसरों तक सीमित न रखकर दैनिक शिक्षण प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कहानियों, संगीत, प्रकृति, गतिविधियों और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से बच्चों में संवेदनशीलता, जिज्ञासा और नैतिक मूल्यों का सहज विकास किया जा सकता है।


इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहाँ भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अतीत के गौरव के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि उसे आधुनिक तकनीक, Artificial Intelligence, वैश्विक दृष्टिकोण और भविष्य की चुनौतियों से जोड़कर देखा गया। यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि यदि शिक्षा को वास्तव में भविष्य के अनुरूप बनाना है, तो उसमें भारतीयता और आधुनिकता दोनों का संतुलित समन्वय आवश्यक है।


आज देश “विकसित भारत 2047” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल का यह प्रयास यह संदेश देता है कि भारत की नई शिक्षा वही होगी जो बच्चों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि जीवन, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करे। ऐसी शिक्षा जो उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ नैतिक, संवेदनशील, विचारशील और आत्मगौरव से भरपूर नागरिक बनाए।


डॉ. वसुधा कपूर के दूरदर्शी नेतृत्व में द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल जिस प्रकार भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक शिक्षा के बीच सेतु बनाने का कार्य कर रहा है, वह केवल काशीपुर या उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के शिक्षा जगत के लिए प्रेरणा का विषय है। “सामन्वय” वास्तव में एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा को नई दिशा देने वाला एक प्रभावशाली शैक्षिक आंदोलन बनता दिखाई दे रहा है।

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