October 24, 2026
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सुदर्शन समाचार ब्यूरो

लगभग 650 एकड़ में फैली खुली जेल की व्यवस्था को करीब से जाना; बंदियों के पुनर्वास, शिक्षा एवं कौशल विकास की गतिविधियों का किया अध्ययन।

काशीपुर: सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया लॉ कॉलेज, काशीपुर के विधि विद्यार्थियों ने पहली बार ममता पंत सिविल जज (सीनियर डिवीजन), सचिव, विधिक सेवा प्राधिकरण, उधमसिंहनगर के मार्गदर्शन एवं सहयोग से उत्तराखंड के सितारगंज स्थित केंद्रीय कारागार/संपूर्णानंद शिविर (Open Correctional Home) का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने खुली जेल की कार्यप्रणाली, कारागार प्रशासन, बंदियों के मानवाधिकार, सुधारात्मक न्याय व्यवस्था तथा उनके सामाजिक पुनर्वास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अध्ययन उत्तराखंड के सितारगंज स्थित सम्पूर्णानंद शिविर एवं केंद्रीय कारागार के वर्तमान वरिष्ठ अधीक्षक श्री अनुराग मलिक के दिशानिर्देशन में किया।
लगभग 650 एकड़ क्षेत्र में फैले इस शिविर की व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। वरिष्ठ अधीक्षक अनुराग मलिक ने इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थीयों को यह बताया कि कारागार व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बंदियों में अनुशासन, आत्मनिर्भरता, सकारात्मक सोच एवं सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करना भी है।
संपूर्णानंद शिविर में बंदियों को निर्धारित नियमों, पात्रता एवं आचरण के आधार पर विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने के अवसर दिए जाते हैं। विद्यार्थियों ने जाना कि अच्छे आचरण वाले पात्र बंदियों को खुली जेल की व्यवस्था के अंतर्गत अपेक्षाकृत स्वतंत्र वातावरण में कार्य करने का अवसर मिल सकता है।
शिविर में बंदियों के आवास के लिए अलग-अलग अहाते एवं बैरक हैं। सुरक्षा एवं निगरानी के लिए वॉच टावर की व्यवस्था भी है।
भ्रमण के दौरान वरिष्ठ अधीक्षक अनुराग मलिक ने विद्यार्थियों को पैरोल एवं फरलो जैसी व्यवस्थाओं के विषय में भी जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि पैरोल और फरलो निर्धारित कानूनी प्रावधानों एवं नियमों के अधीन दी जाती हैं। इन व्यवस्थाओं का अध्ययन विद्यार्थियों के लिए कारागार कानून की व्यावहारिक समझ विकसित करने में सहायक रहा।
वरिष्ठ अधीक्षक अनुराग मलिक ने बताया शिविर में बंदियों को उनकी रुचि एवं योग्यता के अनुरूप विभिन्न कार्यों में संलग्न किया जाता है, जिससे वे अपने कौशल को विकसित कर सकें और रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें। वर्तमान समय में बंदियों द्वारा बेकरी, फर्नीचर, जैविक खाद, पौधशाला एवं कृषि कार्य, गमला निर्माण, अनुपयोगी पेन से अलग अलग डिजाइन के पॉट का निर्माण, अंडे की ट्रे से कलाकृतियों का निर्माण कर रहे हैं। जेल परिसर के अंदर कैदियों को रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए मिंडा कंपनी के सहयोग से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की गई है, जहाँ बंदी मोटरसाइकिल के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और सब-असेंबली उपकरण तैयार करते हैं। वरिष्ठ जेल अधीक्षक अनुराग मलिक ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे वे जेल में रहते हुए भी अपनी आजीविका कमा सकें।
इन गतिविधियों से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगारपरक कार्य बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में पुनः स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने महिला बंदियों के लिए निर्धारित परिसर एवं वहाँ संचालित गतिविधियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। महिला बंदियों को भी अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य करने के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं।
विद्यार्थियों को बताया गया कि कुछ महिला बंदियाँ खाद्य पदार्थ तैयार करने जैसे कार्यों में भी संलग्न हैं। उदाहरण के तौर पर, नेपाली महिला बंदियों द्वारा मोमोज तैयार करने तथा उनकी बिक्री से संबंधित गतिविधियों की जानकारी मिली।
इसके अतिरिक्त, छोटे बच्चों के अपनी माताओं के साथ रहने की व्यवस्था के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया गया। निर्धारित नियमों के अनुसार, छह वर्ष की आयु तक बच्चे को अपनी माँ के साथ रहने की अनुमति दी जा सकती है। यह व्यवस्था महिला बंदियों के साथ रहने वाले बच्चों की देखभाल एवं उनके हितों से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाती है।
वरिष्ठ अधीक्षक अनुराग मलिक ने बताया कि संपूर्णानंद शिविर में बंदियों की शिक्षा एवं व्यक्तिगत विकास के लिए भी व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को बताया गया कि जो बंदी आगे पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए विद्यालयी शिक्षा तथा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अध्ययन करने के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। IGNOU और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय सहित विभिन्न शैक्षणिक माध्यमों से शिक्षा प्राप्त करने की व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी दी गई।
इसके साथ ही, सुबह की दिनचर्या में योग, व्यायाम एवं ध्यान जैसी गतिविधियों का महत्व बताया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य बंदियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा उनमें अनुशासन की भावना विकसित करना है।
विद्यार्थियों ने शिविर की भोजन व्यवस्था एवं कैंटीन का भी अवलोकन किया। यहाँ बंदियों के लिए सामूहिक रसोई में भोजन तैयार किया जाता है। विद्यार्थियों को लगभग 700 लोगों के लिए भोजन तैयार करने की क्षमता वाली रसोई की जानकारी दी गई।
कैंटीन में भोजन, मिठाइयाँ, विभिन्न प्रकार के बिस्कुट एवं अन्य खाद्य सामग्री उपलब्ध होने की जानकारी मिली। बंदियों के लिए परिवार द्वारा जमा कराई गई धनराशि का उपयोग करने हेतु कार्ड-आधारित व्यवस्था के बारे में भी बताया गया।
परिवार से संपर्क बनाए रखने के लिए निर्धारित नियमों के अंतर्गत टेलीफोन पर बात करने की सुविधा उपलब्ध है। विद्यार्थियों को बताया गया कि बंदियों को सप्ताह में निर्धारित दिनों के अनुसार सीमित अवधि, लगभग पाँच मिनट तक, फोन पर बात करने का अवसर दिया जाता है।
इसके अतिरिक्त, शिविर में बंदियों के लिए रेडियो कार्यक्रम ‘रेडियो परवाज़’ के माध्यम से उनकी पसंद के गीत प्रसारित किए जाने की जानकारी भी मिली। इस प्रकार की गतिविधियाँ बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती हैं।
विद्यार्थियों को बताया गया कि अच्छे आचरण वाले पात्र बंदियों को निर्धारित नियमों के अंतर्गत जेल परिसर से बाहर कृषि कार्य करने का अवसर भी दिया जा सकता है। शिविर से कुछ दूर स्थित कृषि भूमि पर दो बंदियों के रहने एवं कार्य करने की व्यवस्था की जानकारी मिली। बताया गया कि वे वहाँ झोपड़ी में रहते हैं और निर्धारित अनुमति के अंतर्गत अपने परिवार के साथ भी रह सकते हैं।
यह व्यवस्था खुली जेल की अवधारणा को समझने का महत्वपूर्ण उदाहरण रही। इसके माध्यम से विद्यार्थियों ने जाना कि उचित निगरानी एवं निर्धारित शर्तों के अधीन बंदियों को जिम्मेदारी सौंपना उनके पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को वरिष्ठ अधीक्षक अनुराग मलिक ने शिविर में अनुशासन एवं नशामुक्त वातावरण बनाए रखने के प्रयासों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह केंद्रीय कारागार दो वर्षों से धूम्रपान मुक्त कारागार है।
इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि सुधारात्मक कारागार व्यवस्था में अनुशासन, स्वास्थ्य एवं सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों को बंदियों की रिहाई से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि पात्रता एवं संबंधित नियमों के अनुसार निर्धारित अधिकारियों द्वारा बंदियों के आचरण, अभिलेखों तथा अन्य आवश्यक पहलुओं की जाँच की जाती है। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।
इस विषय ने विद्यार्थियों को कारागार प्रशासन, बंदियों के अधिकारों तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के व्यावहारिक महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया।
केंद्रीय कारागार/संपूर्णानंद शिविर का यह शैक्षणिक भ्रमण विधि विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक अनुभव रहा। विद्यार्थियों ने कारागार प्रशासन, मानवाधिकार, बंदियों के पुनर्वास, सुधारात्मक न्याय, शिक्षा, रोजगारपरक प्रशिक्षण तथा समाज में पुनः समायोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को वास्तविक परिस्थितियों के संदर्भ में समझा।
इस शैक्षणिक भ्रमण के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधमसिंह नगर की सचिव श्रीमती ममता पंत ने विद्यार्थियों को कैदियों के साक्षात्कार की प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप निर्धारित प्रश्नावली के माध्यम से कैदियों का साक्षात्कार लेकर विद्यार्थियों को इस प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने कैदियों की परिस्थितियों, उनकी समस्याओं तथा उनके पुनर्वास से संबंधित विभिन्न पहलुओं को समझा।
इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है तथा उनमें कानून के प्रति संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है।
इस शैक्षणिक भ्रमण का संचालन लॉ कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर श्री आशुतोष कुमार, श्री आर. डी. शर्मा, श्री अभय कुमार, श्री प्रियांशु कुमार एवं सुश्री ज्योति जलाल के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया लॉ कॉलेज, काशीपुर द्वारा आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के विधिक ज्ञान एवं व्यावहारिक समझ को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।

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