April 26, 2026
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सुदर्शन समाचार ब्यूरो

काशीपुर। गुरुकुल फाउंडेशन द्वारा विशेष बच्चों (असहाय बच्चों) के लिए एक सराहनीय और अनोखी पहल की शुरुआत की गई है, जिसमें डी – बाली ग्रुप की डायरेक्टर उर्वशी दत्त बाली की अहम भूमिका रही है। उनके प्रयासों से ही यह पहल साकार हो पाई है, जिसका उद्देश्य इन बच्चों को हर महीने सीखने और आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। यहां बताते चले कि द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल में “युवा लीडर्स – मासिक शनिवार नेतृत्व कार्यक्रम” के अंतर्गत “मेरी पहचान, मेरी टीम” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस हॉस्टल के विद्यार्थियों का द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल में गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया।

इस कार्यक्रम के तहत गुरुकुल स्कूल में महीने में एक दिन इन बच्चों को आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अन्य विद्यार्थियों के साथ मिलकर विभिन्न शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इससे इन बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें समाज के साथ घुलने-मिलने का अवसर भी मिलेगा।
कार्यक्रम में कंप्यूटर, पेंटिंग और अन्य स्किल-बेस्ड गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया जाएगा। साथ ही, नियमित प्रतियोगिताओं के जरिए उनमें उत्साह और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि श्रीमती उर्वशी दत्त बाली के प्रयासों से ही इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है।

यूनाइटेड किंगडम की यूनिवर्सिटी आफ ऑक्सफोर्ड के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन से जुड़े स्कॉलर एवं यश फाउंडेशन इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तेजस डोगरा भी इस अभियान से जुड़े हैं। उनके मार्गदर्शन से बच्चों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिल रही है।गुरुकुल फाउंडेशन की प्रिंसिपल मीनल वडावर तथा डायरेक्टर वसुधा कपूर और नीरज कपूर के नेतृत्व में यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभर रही है।इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि गुरुकुल के विद्यार्थी, जो एक सशक्त पारिवारिक वातावरण से आते हैं, उन्हें ऐसे बच्चों के जीवन को समझने का अवसर मिलेगा जिनके पास पारिवारिक सहयोग नहीं है। इससे उनमें संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता का विकास होगा।
कुल मिलाकर, डी-बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली के दिन रात किए जा रहे प्रयासों के चलते यह पहल न केवल शिक्षा के आदान-प्रदान तक सीमित है, बल्कि मानवीय मूल्यों, सहयोग और एक सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो रही है।

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