

रामनगर:रामनगर के ढिकुली स्थित एक रिसोर्ट में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के तत्वावधान में एक दिवसीय ‘कंजर्विंग शेयर्ड लैंडस्केप इंटर एस्टेट कोऑर्डिनेशन मीटिंग’ का आयोजन किया गया। बैठक में उत्तराखंड सहित पांच राज्यों के वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लेते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियों और वन्यजीव संरक्षण के प्रभावी उपायों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ, सीसीएफ, डीजी फॉरेस्ट, डीएफओ, एसीएफ, एंटी पोचिंग सेल के अधिकारी, भारतीय वन्यजीव संस्थान के प्रतिनिधि तथा वन क्षेत्राधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन दो सत्रों में किया गया, जिसमें साझा संरक्षण परिदृश्य (कंजर्वेशन लैंडस्केप) और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
इस दौरान उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल भी बैठक में मौजूद रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष आज एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। ऐसे में पांचों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर वन्यजीवों की सुरक्षा, आधुनिक तकनीक के उपयोग और प्रभावी प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वन्यजीवों की आवाजाही को देखते हुए राज्यों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी लाई जा सकेगी।
बैठक में विभिन्न राज्यों से आए वन अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव और सुझाव साझा किए। मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण बढ़ रही मृत्यु दर पर चिंता व्यक्त करते हुए इससे निपटने के लिए कई व्यावहारिक सुझावों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने जागरूकता अभियान, त्वरित सूचना तंत्र, आधुनिक निगरानी तकनीक और स्थानीय समुदायों की सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया।




