February 7, 2026

पूर्वांचल के प्रमुख त्यौहार छठ पूजा महोत्सव के मौके पर काशीपुर में भले ही प्रशासन के द्वारा कोविड-19 गाइडलाइंस के अनुसार छठ पूजा की अनुमति दे दी गई है लेकिन सरकारी तंत्र की लापरवाही साफ़ उजागर हो रही है। सरकारी तंत्र की लापरवाही का आलम यह है कि सिंचाई विभाग के द्वारा न तो महादेव नहर की सफाई ही करवाई गई और ना ही महादेव नहर में साफ पानी छोड़ा गया।

पूर्वांचल छठ सेवा एवं जन कल्याण समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष दिनेश प्रसाद ने छठ पूजा के बारे में बताते हुए कहा कि बीते रोज नहाए खाए के साथ शुरू हो चुकी है। आज के पूजन को खरना कहते हैं जिसमें आम की लकड़ी के चूल्हे पर सांठी के चावल की खीर प्रसाद के रूप में शाम को ग्रहण की जाएगी। कल शाम को पूरे देश में व्रत धारी महिला पुरुष छठ पूजा के घाटों पर अस्त होते सूर्य भगवान की पूजा करे देश, विश्व की शांति तथा खुशहाली और अपने परिवार की खुशहाली और शांति के लिए प्रार्थना करेंगी। वही 21 नवंबर को सूर्योदय होने से पहले जल में खड़े होकर महिलाएं सूर्योदय होने तक सूर्य भगवान और छठी मैया की प्रार्थना करते रहते हैं। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए 1986 से लेकर अब तक के इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि वर्ष 2015 से यहां छठ महापर्व की शुरुआत की गई।

उनके मुताबिक इस बार कोरोना के चलते स्थानीय प्रशासन के द्वारा उन्हें छठ पूजा महोत्सव की अनुमति नहीं दी गई थी लेकिन बाद में जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के चलते हैं स्थानीय प्रशासन के द्वारा कोरोना की गाइडलाइंस के बीच स्थानीय प्रशासन के द्वारा उन्हें 200 लोगों के कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति दी गई है। इसी वजह से उन्होंने इस बार कार्यक्रम के किसी तरह के भी आमंत्रण कार्ड नहीं वितरित किए हैं। उनके मुताबिक महज 2 दिन पहले ही सिंचाई विभाग के कर्मचारी यहां आए हैं आर नहर में गंदगी बरकरार है और यह पूरी तरह से साफ नहीं हुई है। जिस वजह से व्रत धारी महिला पुरुषों को साफ घाट उपलब्ध कराने में उन्हें परेशानी हो रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से व्रत धारी महिला पुरुषों से निवेदन किया है कि वह कम से कम संख्या में घाटों पर पूजा करने के लिए आए साथ ही अपने साथ किसी तरह की भीड़ ना लाएं।

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