February 7, 2026

खबर प्रवाह (NEWS FLOW) 11 अक्टूबर, 2025

काशीपुर में आज से दो दिवसीय 23वीं उत्तराखंड सब जूनियर कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के पहले दिन बालिका वर्ग में नैनीताल की टीम, दूसरे मैच में देहरादून, तीसरे मैच में हरिद्वार की टीम विजय रही। वहीं बालक वर्ग में पहले मैच में देहरादून, दूसरे मैच में उधम सिंह नगर व तीसरे मैच में बागेश्वर की टीम विजय रही। प्रतियोगिता के शुभारम्भ के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और काशीपुर नगर निगम महापौर दीपक बाली रहे। आज से शुरू हुई यह कबड्डी प्रतियोगिता में राज्य भर से 20 टीमें प्रतिभाग कर रही हैं।

खेल की ऊर्जा और युवाओं के जज़्बे से सराबोर वातावरण में कुंडेश्वरी रोड स्थित समर स्टडी हॉल विद्यालय इन दिनों उत्तराखंड की खेल संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन गया है। यहां 23वीं उत्तराखंड सब जूनियर कबड्डी प्रतियोगिता (बालक एवं बालिका वर्ग) का भव्य आयोजन जारी है, जिसमें उत्तराखंड के बारह जिलों की लगभग बीस टीमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। इस राज्यस्तरीय आयोजन की मेजबानी समर स्टडी हॉल विद्यालय ने की है, जबकि आयोजन का दायित्व उधम सिंह नगर कबड्डी एसोसिएशन ने संभाला है, जो उत्तराखंड कबड्डी फेडरेशन के तत्वावधान में संपन्न हो रहा है। प्रतियोगिता का शुभारंभ विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और नगर निगम काशीपुर के मेयर दीपक बाली ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उनके साथ मंच पर एथलीट गोल्ड मेडलिस्ट विजेंद्र चौधरी, फेडरेशन अध्यक्ष महेश जोशी, एसोसिएशन उपाध्यक्ष मेजर सिंह, समर स्टडी हॉल ग्रुप की अध्यक्षा मुक्ता सिंह, सचिव चेतन जोशी, उपसचिव महेंद्र सिंह, डायरेक्टर राहुल पैगिया, उपाध्यक्ष दिलबाग सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष अनुराग कुमार सिंह, सचिव बृजेश दुबे और प्रधानाचार्य अनुज भाटिया उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब मुख्य अतिथियों ने विद्यालय के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को सम्मानित किया। छात्रों को ट्रॉफी प्रदान की गई और उनके अभिभावकों को शॉल ओढ़ाकर गौरवान्वित किया गया। सम्मान पाने वालों में सक्षम प्रताप सिंह (एथलेटिक्स), पूजा रावत (एथलेटिक्स), प्रखर सक्सैना (चेस), ललित सिंह (एथलेटिक्स), नैंसी रावत (एथलेटिक्स), कवलीन कौर (क्रिकेट) और दीपांशी भारद्वाज (फेंसिंग व एथलेटिक्स) शामिल रहे। जब इन होनहार विद्यार्थियों के नाम पुकारे गए, तो विद्यालय प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अभिभावकों के चेहरे गर्व से चमक उठे और विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास झलकने लगा। इस सम्मान समारोह ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण का फल अवश्य मिलता है। विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर यह संदेश दिया कि खेल न केवल शारीरिक विकास का माध्यम हैं बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और एकता की भावना को भी जन्म देते हैं।

प्रतियोगिता के पहले दिन हुए मैचों ने दर्शकों में रोमांच भर दिया। बालिका वर्ग के मुकाबलों में नैनीताल ने पौड़ी को 30-16 से मात देकर शानदार शुरुआत की। देहरादून की टीम ने पिथौरागढ़ को 31-15 से हराकर अपने मजबूत इरादों का परिचय दिया, जबकि हरिद्वार की बालिकाओं ने उधम सिंह नगर को 39-22 से पराजित कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। बालक वर्ग में देहरादून ने टिहरी को 33-20 से मात दी, उधम सिंह नगर ने उत्तरकाशी को 44-11 के विशाल अंतर से हराया, और बागेश्वर ने पिथौरागढ़ को 32-24 से हराकर अपनी दावेदारी मजबूत की। खिलाड़ियों की फुर्ती, रणनीति और खेल के प्रति समर्पण ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खेल मैदान उत्साह और जयकारों से गूंज उठा। प्रतियोगिता के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले 12 अक्टूबर 2025 को खेले जाएंगे, जिनका इंतजार अब हर खेलप्रेमी को बेसब्री से है।

निर्णायक मंडल ने प्रतियोगिता को अनुशासित, पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। रेफरी इंचार्ज गुडमोहर शाह के नेतृत्व में निर्णायक प्रवीण (टिहरी), आदेश डबराल (देहरादून), प्रवीण चौहान (देहरादून), नरेंद्र चौहान (देहरादून), रवि राठी (हरिद्वार), समीर (हरिद्वार), सुमित कुमार (हरिद्वार), शालिनी आर्य (उधम सिंह नगर), विमल पांडे (उधम सिंह नगर) और पलक (उधम सिंह नगर) ने अपने अनुभव और दक्षता से प्रतियोगिता का संचालन किया। उन्होंने खेल भावना को सर्वोपरि रखते हुए हर मुकाबले को निष्ठा और पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और निर्णायकों के निर्णयों पर दर्शकों ने भरोसा जताया और तालियों से उनका स्वागत किया। प्रतियोगिता का वातावरण अनुशासन और सम्मान की भावना से भरा रहा, जिसने सभी के दिलों को छू लिया।

इस आयोजन की शोभा बढ़ाने पहुंचे विशेष अतिथियों में नरेंद्र सिंह (पूर्व उपाध्यक्ष कबड्डी एसोसिएशन), आर. एस. तिवारी (प्रधानाध्यापक सेमफोर्ड स्कूल), जतिन शर्मा (अध्यक्ष राधे हरि डिग्री कॉलेज काशीपुर), मनदीप सिंह ढिल्लन (पूर्व छात्र संघ सचिव), पायल थापा (विश्वविद्यालय प्रतिनिधि), संजय चौधरी (पूर्व ग्राम प्रधान), अमित नारंग (ग्राम प्रधान हल्दुआ), शशांक चौधरी (उपप्रधानाचार्य) और मनु अग्रवाल सहित विद्यालय का पूरा स्टाफ उपस्थित रहा। सभी ने खेलों को शिक्षा के समान महत्वपूर्ण बताते हुए खिलाड़ियों की मेहनत और आयोजन समिति की लगन की सराहना की। कार्यक्रम का हर क्षण उत्साह, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहा। समर स्टडी हॉल विद्यालय ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि खेल के माध्यम से भी शिक्षा और संस्कारों को नई दिशा दी जा सकती है।

उत्तराखंड कबड्डी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मेजर सिंह ने अपने उत्साहपूर्ण संबोधन में कहा कि यह प्रतियोगिता केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण आत्मा और युवा शक्ति का उत्सव है। उन्होंने विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, आयोजन समिति और विद्यालय प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इनके सहयोग से यह आयोजन बेहद प्रेरणादायक बन पाया है। उन्होंने कहा कि कबड्डी हमारी मिट्टी से जुड़ा खेल है, जो साहस, अनुशासन और एकता का प्रतीक है। मेजर सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता में शामिल लगभग निन्यानवे प्रतिशत खिलाड़ी सरकारी विद्यालयों से हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपार जज़्बे से मैदान में उतर रहे हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि यही बच्चे भविष्य में उत्तराखंड और भारत का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एसोसिएशन का उद्देश्य हर ग्रामीण क्षेत्र तक खेल की पहुंच सुनिश्चित करना है ताकि कोई प्रतिभा साधनों की कमी से पीछे न रह जाए। मेजर सिंह ने शिक्षकों और प्रशिक्षकों को भी नमन किया, जो इन खिलाड़ियों को तराशने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में उत्तराखंड कबड्डी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराएगा।

समर स्टडी हॉल ग्रुप की अध्यक्षा मुक्ता सिंह ने अपने भावनात्मक संबोधन में कहा कि किसी भी प्रतियोगिता में जीत या हार से अधिक महत्वपूर्ण भागीदारी होती है। उन्होंने कहा कि हर वह खिलाड़ी जो मैदान में उतरता है, वह पहले से ही विजेता होता है, क्योंकि साहस के साथ भाग लेना ही असली सफलता है। उन्होंने कहा कि आज मैदान में बैठी हर बालिका और हर बालक मेहनत और समर्पण की मिसाल हैं, जो साबित करते हैं कि धूप और कठिनाइयाँ भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस आयोजन को कवरेज देकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी जीत वह है, जब कोई अपना सर्वश्रेष्ठ देता है—चाहे परिणाम कुछ भी हो। मुस्कराते हुए उन्होंने कहा, “जो जीता वो भी सिकंदर है, जो नहीं जीता, वो भी सिकंदर है,” क्योंकि असली जीत आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास में छिपी होती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि अपने हुनर को पहचानें, आत्मविश्वास बनाए रखें और हर चुनौती को अवसर में बदलने का साहस रखें।

मेयर दीपक बाली ने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास, अनुशासन और जोश का उत्सव है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आए खिलाड़ियों का जोश देखकर यह स्पष्ट है कि राज्य का भविष्य सुनहरा है। उन्होंने आयोजन समिति और विद्यालय प्रबंधन का धन्यवाद करते हुए कहा कि समर स्टडी हॉल ग्रुप ने खिलाड़ियों के रहने, खाने और प्रशिक्षण की उत्कृष्ट व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि खेल जीवन का अभिन्न अंग है और हार-जीत केवल एक पड़ाव। असली विजेता वही होता है जो हार को अपनी अगली जीत का आधार बनाता है। उन्होंने कहा, “मन छोटा होगा तो लक्ष्य दूर रह जाएगा, लेकिन मन बड़ा होगा तो कोई भी जीत असंभव नहीं।” दीपक बाली ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के ‘खेलो इंडिया’ और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत काशीपुर पुलिस स्टेडियम को अत्याधुनिक खेल परिसर के रूप में विकसित करने के लिए लगभग पैंतालीस करोड़ रुपये की योजना पर कार्य चल रहा है, जिससे युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि जब जज़्बा सच्चा हो, तो न सीमाएँ मायने रखती हैं, न संसाधनों की कमी—सिर्फ मेहनत, विश्वास और संकल्प ही जीत की असली पहचान हैं।

एथलेटिक्स सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन विजेंद्र चौधरी ने अपने प्रेरणादायक विचार रखते हुए कहा कि खेल जीवन का सार हैं। उन्होंने कहा कि जो खिलाड़ी आज मैदान में पसीना बहाता है, वही कल जीत की चमक लेकर लौटता है। उन्होंने कहा कि “हिम्मत नहीं तो प्रतीक्षा नहीं, विरोधी नहीं तो प्रगति नहीं”—यानी कठिनाइयाँ ही हमें मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी खेल का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है; जो सच्चे मन से खेलता है, वही वास्तविक विजेता कहलाता है। चौधरी ने कहा कि शिक्षा और खेल जीवन के दो पंख हैं—एक बुद्धि को विकसित करता है, दूसरा व्यक्तित्व को। उन्होंने हँसी-मजाक के लहजे में कहा, “लोग पूछते हैं बच्चे क्या बनना चाहते हैं, लेकिन किसी खिलाड़ी से पूछिए—वह सपनों को मैदान में जीता है।” उन्होंने कहा कि हर गिरना एक नई उड़ान की शुरुआत है। जब पसीना ईमानदारी से बहता है, तो सफलता सिर झुकाकर सलाम करती है। इस प्रेरणादायक आयोजन ने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड की धरती न केवल देवभूमि है, बल्कि खेलभूमि भी बन चुकी है, जहाँ हर युवा खिलाड़ी सपनों को हकीकत में बदलने का साहस रखता है।

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