February 7, 2026

खबर प्रवाह (09 मार्च, 2023)

रंगों के पर्व होली का त्यौहार देश और प्रदेश के साथ साथ काशीपुर तथा आसपास के क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। काशीपुर में बीती शाम श्री रामलीला मैदान में इस मौके पर एक भजन संध्या का आयोजन किया गया। देर रात तक चली भजन संध्या में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रोताओं ने जमकर लुत्फ उठाया।

आपको बताते चलें कि काशीपुर में रामनगर रोड स्थित श्री रामलीला मैदान में बीते कई वर्षों से भारत विकास परिषद के द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया जाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों से आयोजित होली मिलन समारोह के दौरान भजन संध्या के आयोजन की परंपरा के क्रम में इस वर्ष हल्द्वानी से आये गजल और भजन गायक प्रभाकर जोशी तथा बॉलीवुड के लिए गीत गाकर अपनी गायकी की छटा बिखेरने वाली नैनीताल की रहने वाली दीप्ति जोशी ने कार्यक्रम में पहुंचे श्रोताओं को राधा कृष्ण के भजन तथा राधा कृष्ण की होली से संबंधित गीत गाकर झूमने पर मजबूर कर दिया। देर रात तक चली भजन संध्या के अंत में “जो राम को लाए हैं हम उनको लाएंगे” आदि नामक गीत पर श्रोता झूम उठे। इस मौके पर भारत विकास परिषद के कोषाध्यक्ष प्रियांशु मित्तल ने कहा कि पिछले 50 वर्षों से होली मिलन समारोह का आयोजन किया जाता रहा है और पिछले 33 वर्षों से भारत विकास परिषद द्वारा पारिवारिक होली मिलन समारोह का आयोजन किया जाता रहा है। इस दौरान श्री रामलीला मैदान में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों और विभिन्न एनजीओ के द्वारा स्टाल भी लगाए जाते हैं। खास बात यह है कि सभी गणमान्य और शहर के लोग जाति और धर्म कांटा करके एक दूसरे के गले लग कर होली की बधाई दे रहे हैं। भजन संध्या में अपनी गायकी की छटा भी बिखेरने वाले कुमाऊं के प्रसिद्ध भजन और गजल गायक प्रभाकर जोशी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए भारत विकास परिषद और काशीपुर की जनता को धन्यवाद दिया जिन्होंने भाव विभोर और भक्ति में होकर उनके द्वारा दी गई प्रस्तुति को तालियों से तथा नृत्य कर सराहा। उन्होंने कहा कि वह अमूमन गजल, सूफियाना कलाम तथा बॉलीवुड के गीत गाते हैं लेकिन यहां विशेष फरमाइश पर भजन गाए गए। उन्होंने अपने साथ देने के लिए नैनीताल से पहुंची बॉलीवुड गायिका दीप्ति जोशी का भी धन्यवाद दिया। वही इस मौके पर बॉलीवुड गायिका दीप्ति जोशी ने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाने के लिए इस तरह के आयोजनों का होना बहुत जरूरी है क्योंकि अपनी संस्कृति और परंपरा को हम नहीं भूल सकते हैं।

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