April 10, 2026
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सुदर्शन समाचार ब्यूरो

काशीपुर:भारत सरकार और आयुष मंत्रालय के प्रोत्साहन से अब होम्योपैथी बनी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा प्रणाली जहाँ डॉ. रजनीश कुमार शर्मा और डॉ. अक्षय चौहान ने बिना साइड इफेक्ट वाले सस्ते और सुलभउपचार को सराहा।

काशीपुर। विश्व होम्योपैथी दिवस के पावन अवसर पर होम्यो क्योर एंड रिसर्च सेंटर के तत्वावधान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने चिकित्सा जगत में एक नई चेतना का संचार कर दिया है। आधुनिक होम्योपैथी के प्रणेता और महान जर्मन चिकित्सक डॉ.सैमुअल हैनीमैन की जयंती को समर्पित इस उत्सव का नेतृत्व प्रख्यात होम्योपैथ डॉ. रजनीश कुमार शर्मा ने किया, जिनके सानिध्य में चिकित्सा जगत की कई नामचीन हस्तियां इस समारोह का हिस्सा बनीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रजनीश कुमार शर्मा द्वारा डॉ. हैनीमैन के तैल चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित करने के साथ हुआ, जिसके बाद वहां उपस्थित समस्त चिकित्सकों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर इस महान विभूति को याद किया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह से सेवा और समर्पण के भाव से ओतप्रोत नजर आया और वक्ताओं ने होम्योपैथी की महत्ता को रेखांकित करते हुए समाज के हर वर्ग तक इस चिकित्सा पद्धति को पहुंचाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह था, बल्कि यह आधुनिक युग में प्राचीन और प्रभावी चिकित्सा पद्धतियों के पुनरुद्धार का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ।समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. रजनीश कुमार शर्मा ने अपने ओजस्वी संबोधन में वर्तमान सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत सरकार प्राचीन और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को पुनर्जीवित करने के लिए जिस प्रकार से समर्पित है, वह सराहनीय है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान परिदृश्य में होम्योपैथी को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिल रहा है, जो कि इस पद्धति की स्वीकार्यता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। डॉ. रजनीश कुमार शर्मा ने बताया कि प्रतिवर्ष डॉ. सैमुअल हैनीमैन की याद में मनाया जाने वाला विश्व होम्योपैथी दिवस इस बार अत्यंत खास है, क्योंकि इस वर्ष की थीम ‘होम्योपैथी के माध्यम से सामंजस्य-सीमाओं से परे उपचार’ निर्धारित की गई है। यह विषय अपने आप में यह संदेश देता है कि होम्योपैथी की कोई सीमा नहीं है और यह हर भौगोलिक एवं शारीरिक बाधा को पार कर रोगी को पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करने में सक्षम है। सरकार की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज होम्योपैथी देश की मुख्यधारा की चिकित्सा प्रणाली में अपना स्थान मजबूती से बना चुकी है।

चिकित्सा पद्धति के विकास क्रम पर चर्चा करते हुए डॉ. रजनीश कुमार शर्मा ने आयुष मंत्रालय की स्थापना को एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयुर्वेद और होम्योपैथी जैसी प्रणालियों के संवर्धन हेतु अलग से मंत्रालय बनाना यह दर्शाता है कि अब हमारा देश अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है और प्राकृतिक उपचार विधियों पर भरोसा कर रहा है। मंत्रालय के गठन के पश्चात से ही इन चिकित्सा पद्धतियों के बुनियादी ढांचे, शोध और विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे न केवल चिकित्सकों का मनोबल बढ़ा है बल्कि आम जनता का विश्वास भी होम्योपैथी के प्रति प्रगाढ़ हुआ है। उन्होंने आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि होम्योपैथी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसका मानव शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव यानी साइड इफेक्ट नहीं होता। यह एक अत्यंत सौम्य और सुरक्षित चिकित्सा प्रणाली है, जिसे नवजात शिशुओं से लेकर गर्भवती महिलाओं और वृद्धों तक, बिना किसी भय के अपनाया जा सकता है। जहाँ एलोपैथी में कई दवाएं जटिलताओं के कारण छोटे बच्चों और गर्भवती स्त्रियों को नहीं दी जा सकतीं, वहीं होम्योपैथी इन नाजुक स्थितियों में संजीवनी का कार्य करती है।

इसी क्रम में कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अक्षय चौहान ने होम्योपैथी की व्यापकता और इसकी आर्थिक सुलभता पर प्रकाश डालते हुए इसे आम आदमी की चिकित्सा पद्धति करार दिया। डॉ. अक्षय चौहान ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के समय में लगभग हर छोटी-बड़ी और असाध्य मानी जाने वाली बीमारियों का सफल उपचार होम्योपैथी के माध्यम से संभव है। उन्होंने तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए बताया कि एलोपैथी की महंगी दवाओं और खर्चीले टेस्ट की तुलना में होम्योपैथी काफी सस्ती और सुलभ है, जो इसे भारत जैसे विकासशील देश के लिए वरदान बनाती है। डॉ. अक्षय चौहान का यह दावा कि भारत की होम्योपैथी प्रणाली दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों में से एक है, गर्व का विषय है। उनके अनुसार, भारत में जिस तरह का चिकित्सा ढांचा और विशेषज्ञों की उपलब्धता होम्योपैथी के क्षेत्र में है, वैसी व्यवस्था विकसित देशों में भी दुर्लभ है। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर होम्योपैथी के क्षेत्र में मार्गदर्शन के लिए देख रही है और हमारे देश के शोध पूरी दुनिया में सराहे जा रहे हैं।

वर्तमान समय की जीवनशैली से उपजी समस्याओं पर बात करते हुए वक्ताओं ने यह रेखांकित किया कि भारत में होम्योपैथी विशेष रूप से पुरानी और गैर-संक्रामक बीमारियों, जैसे कि गठिया, एलर्जी, त्वचा रोग और मानसिक तनाव के प्रबंधन में सबसे पसंदीदा पूरक चिकित्सा प्रणाली के रूप में उभर रही है। डॉ. रजनीश कुमार शर्मा और डॉ. अक्षय चौहान दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि आधुनिक भागदौड़ वाली जिंदगी में जहाँ संक्रामक बीमारियों के साथ-साथ जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, वहां होम्योपैथी अपनी विशिष्ट उपचार पद्धति से रोगों को जड़ से समाप्त करने का कार्य कर रही है। यह पद्धति केवल लक्षणों का उपचार नहीं करती, बल्कि रोगी की शारीरिक और मानसिक स्थिति का समग्र विश्लेषण कर उसे स्वस्थ बनाती है। भारत में होम्योपैथी का बढ़ता ग्राफ इस बात का प्रमाण है कि लोग अब प्राकृतिक रूप से ठीक होने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। आज का यह समारोह केवल डॉ. हैनीमैन को याद करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भविष्य की स्वस्थ भारत की परिकल्पना को भी बल प्रदान किया।

होम्यो क्योर एंड रिसर्च सेंटर के इस सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डॉ. रजनीश कुमार शर्मा के नेतृत्व में होम्योपैथी का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है और यह पद्धति स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने शपथ ली कि वे डॉ. सैमुअल हैनीमैन के सिद्धांतों पर चलते हुए मानवता की सेवा करेंगे और होम्योपैथी के प्रचार-प्रसार में अपना संपूर्ण योगदान देंगे। डॉ. अक्षय चौहान ने समापन सत्र में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार और समाज के सहयोग से हम उस लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे जहाँ हर व्यक्ति रोगमुक्त होगा और उसे बिना किसी दुष्प्रभाव के सस्ता व उत्तम इलाज मिल सकेगा। इस भव्य समारोह की गूंज पूरे चिकित्सा जगत में सुनाई दे रही है, जो यह सुनिश्चित करती है कि ‘सीमाओं से परे उपचार’ का संकल्प अब धरातल पर उतर चुका है और भारत इस यात्रा में विश्व का नेतृत्व कर रहा है।

इस विशेष उत्सव ने न केवल चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया, बल्कि स्थानीय जनता के बीच भी होम्योपैथी को लेकर एक नई जागरूकता पैदा की है। डॉ. रजनीश कुमार शर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में शोध और अनुसंधान के माध्यम से इस पद्धति को और अधिक वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया जाएगा ताकि जटिल से जटिल बीमारियों का समाधान ढूंढ निकाला जा सके। डॉ. अक्षय चौहान ने युवाओं और नए चिकित्सकों का आह्वान किया कि वे इस प्राचीन और प्रभावी विज्ञान को गहराई से समझें और इसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर जन-जन तक पहुँचाएं। अंततः, यह जयंती समारोह एक उत्सव से बढ़कर एक वैचारिक क्रांति के रूप में संपन्न हुआ, जिसने यह सन्देश दिया कि होम्योपैथी ही वह मार्ग है जो पूर्ण स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति सुनिश्चित कर सकता है, और भारत इस मार्ग का सबसे सशक्त पथप्रदर्शक बनकर उभरा है।

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