काशीपुर:चैती मेले में इस वर्ष कुछ खास देखने को मिल रहा है। पहली बार चंपावत की प्रसिद्ध बाल मिठाई और लोहाघाट की पारंपरिक कढ़ाही का अद्भुत संगम मेले की रौनक बढ़ा रहा है। मेले में पहुंचने वाले लोग जहां एक ओर उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कारीगरों की कला भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
मेले में आयोजित हथकरघा प्रदर्शनी में स्थानीय उत्पादों और उत्पादकों को विशेष स्थान दिया गया है। यहां विभिन्न क्षेत्रों से आए कारीगर अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें ऊनी वस्त्र, पारंपरिक बर्तन, सजावटी सामान और स्थानीय खानपान शामिल हैं। चंपावत की बाल मिठाई अपने अनोखे स्वाद के कारण लोगों को खूब भा रही है, वहीं लोहाघाट की पारंपरिक कढ़ाही भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।
स्थानीय प्रशासन और मेला समिति द्वारा इस पहल का उद्देश्य स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना और कारीगरों को एक बेहतर मंच प्रदान करना है। इससे न केवल उनकी कला को पहचान मिल रही है, बल्कि उनकी आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
मेले में आए लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। काशीपुर चैती मेला इस बार न केवल मनोरंजन का केंद्र बना हुआ है, बल्कि स्थानीय विरासत और स्वाद का भी बेहतरीन संगम प्रस्तुत कर रहा है।


