देशभर के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक काशीपुर में स्थित मां बाल सुंदरी देवी मंदिर शक्तिपीठ का अपना अलग ही महत्व है। साथ ही इस मंदिर में विराजमान मां भगवती बाल सुंदरी देवी की शक्ति की अपनी अलग ही गाथा है। मां भगवती की शक्ति का प्रमाण मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में स्थित कदंब का वृक्ष है जोकि अपने आप में मां की शक्ति का परिचायक है। इस वृक्ष की खास बात है कि यह वृक्ष पूरी तरह से खोखला है लेकिन फिर भी अपने वृक्षों की तरह हरा भरा है।
आमतौर पर आपने अनेकों वृक्ष देखे होंगे लेकिन प्रत्येक वृक्ष अमूमन ऊपर से नीचे तक का हरा भरा होता है। वही काशीपुर में मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में स्थित परिसर में है एक वृक्ष ऐसा है जोकि ऊपर से नीचे तक पूरी तरह से खोखला है लेकिन उसके बावजूद भी हरा भरा है। इस वृक्ष की पत्तियां पूरी तरह से वृक्ष के खोखला होने के बावजूद भी हरी-भरी हैं। काशीपुर शहर से 5 किलोमीटर दूर स्थित मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में स्थित यह वृक्ष कदंब का वृक्ष है। इसकी खासियत के बारे में मां बाल सुंदरी देवी मंदिर के मुख्य पंडा के तौर पर नियुक्त पंडा विकास कुमार अग्निहोत्री के मुताबिक यह मां बाल सुंदरी देवी मंदिर में मां काली के मंदिर के ठीक सामने स्थित है। उनके मुताबिक प्राचीन मान्यता के अनुसार यह वृक्ष पूरी तरह से जला हुआ है लेकिन फिर भी यह वृक्ष पूरी तरह से हरा भरा है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार अन्य वृक्षों की तरह पूरी तरह से हरा भरा था लेकिन किसी व्यक्ति के द्वारा तर्क किया गया कि इस प्राचीन शक्तिपीठ में क्या सकते हैं तो इसे सिद्ध करने के लिए उनके पूर्वज मां काली के मंदिर में पूजा कर रहे थे। उन्होंने इस वृक्ष के ऊपर पीले सरसों के दाने डाले तो यह वृक्ष पूरी तरह से जल गया। उस व्यक्ति ने इस पर कहा कि किसी भी वृक्ष का विनाश करना या नाश करना शक्ति का परिचायक नहीं होता है। सत्य का परिचय होता है किसी का कल्याण या किसी का उद्धार करना। इस बात को सुनकर उनके पूर्वजों ने पास ही रखे जल को पढ़कर इस वृक्ष पर छिड़का तो यह वृक्ष फिर से हरा भरा हो गया लेकिन इसकी छाल जलने की वजह से खोखली रह गई, जोकि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी आज भी पूरी तरह से खोखली और वृक्ष पूरी तरह से हरा भरा है। अपने आप में अजीबो गरीब यह वृक्ष आज भी मां भगवती की शक्ति को दर्शाता है।






