February 8, 2026

खबर प्रवाह (5 मार्च, 2023)

रंगों के पर्व होली का खुमार अपने चरम पर है। महिलाएं और पुरुष बैठकी होली के माध्यम से धीरे धीरे नजदीक आ रहे होली के त्यौहार की खुमारी में सराबोर होने लगे हैं। 

काशीपुर तथा आसपास के समूचे क्षेत्र में इन दिनों कुमाऊंनी बैठकी होली की धूम है। होल्यार होली के रंग में डूबे हैं। जगह-जगह रंग-अबीर-गुलाल उड़ा कर होली का उल्लास बढ़ाया जा रहा है। इसी के तहत काशीपुर में जगह जगह घरों में महिलाओं के द्वारा बैठकी होली के द्वारा धूम मचाई जा रही है। इस मौके पर काशीपुर में महिलाओं ने दुर्गा कॉलोनी में रश्मि के घर आयोजित बैठकी होली में ढोलक की थाप व मंजीरों पर गीत गायन करने के साथ ही नृत्य कर होली मनाई। इस दौरान एकत्र हुईं महिलाओ ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हुए हिंदी और कुमाऊँनी भाषा मे होली गीत गाकर और नृत्य कर माहौल होलीमय कर दिया। कार्यक्रम के दौरान महिला होल्यार हेमलता बिष्ट ने बताया कि भारत के सबसे प्राचीन त्यौहार होली का पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने बताया कि पूरे देश भर में बरसाने की होली के बाद कुमाऊनी होली का नंबर आता है। कुमाऊनी होली खड़ी होली, बेठकी होली और महिला होली नामक तीन प्रकार की होती है। इसकी शुरुआत पौष माह के पहले रविवार से होती है और पूर्णिमा तिथि तक चलती है। शुरुआत में बसंत पंचमी तक यह पूरी तरह से भक्ति में लीन होता है। इसमें भक्ति प्रेम भरा होता है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसको भक्त और भगवान के एकाकार होने का समय माना जाता है। होली का आगमन होते ही पेड़ो पर नई कोपलों के फूटने की तरह भक्ति और  श्रृंगार रस में सब पूरी तरह से डूब जाते हैं और रोम-रोम आनंदित हो जाता है। खुशी को गायन,  वादन और नृत्य के माध्यम से प्रकट करते हैं। इस दौरान वन में चले दोनों भाई इन्हें समझाओ रे माई, अजब होली खेले गजब होली खेलें, होली का दिन आ गया, पशुपतिनाथ खेले होली नामक होली गीतों पर महिलाएं जमकर थिरकीं। वही कार्यक्रम की आयोजक का रश्मि भट्ट ने कहा कि आज उनके घर में बैठकर होली का कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है जिसकी उन्हें बहुत खुशी है। इस दौरान हारमोनियम, ढोलक, चिमटा तथा मंजीरा आदि वाद्य यंत्रों का प्रयोग भी किया जाता है।

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